प्रकृति देती है मानवता को जीवन आधार, आज चल रहा उसका व्यापार ।
आओ थोडा पढ़कर समझे प्रकृति की महत्ता, उस पर हो रहा अत्याचार ।
प्रकृति ने दिए खुले मैदान, पर्वत, नदियां, उपवन और आसमान ।
धुप, छांव, जल, फल और फूल भी है प्रकृति का वरदान ।
कुछ है ऊँचा कुछ है गहरा, कुछ खुद में राज छुपाये गहरा ।
कुछ गायब कर देता है चेहरा, कुछ देता सरहद बन पहरा ।
फूलों का खिलाना है जीवन खुशियों से भर देना
फूलों का मुरझा जाना सिखलाये जीवन नव देना ।
जल का कल कल, खग और भ्रमरों का संगीत
मानव जीवन में भर देता है प्रित ।
यदि प्रकृति का करोगे अंत
ख़त्म हो जायेगा जीवन से बसंत ।
प्रकृति की छटा है सबसे प्यारी
सुबह की धुप शाम की अंधियारी ।
चाँद की चांदनी टिमटिमाते तारे
लगते है मन को बड़े प्यारे ।
प्रकृति तेरा हर रूप है प्यारा,
जैसे नदियाँ और झरने की धारा ।
जहा गया है इनको सवारा
सवर गया है सभ्यता सारा ।
प्रकृति का करिश्मा है हरियाली
करती है सेवा बनकर माली ।
प्रकृति की है मनमोहक रचना
पर्वतों से सुन्दर हवा का बहना ।
सागर से ठंडी हवा का चलना
तन मन को शीतल कर देना ।
काली काली घटा का घिरना
बारिस की बूंदों का गिरना ।
बूंद बूंद से नदियों का बनना
प्रकृति तेरी अद्भुत है रचना ।
प्रकृति को जो तुम बर्बाद करोगे
जीवन जीना दुस्वार करोगे ।
नहीं मिलेगी ताज़ी हवा नहीं मिलेगी चैन की साँस
ऐसे ही रहे पेड काटते जीवन को लग जाएगी फांस ।
भविष्य में जीवन को ओक्सिजन बैग से मुक्त है करना
पेड़ लगाओ सीखो उपयुक्त समय का करना ।