खुशी क्या है वो एक नन्हें की किलकारी में दिख जाये ।
जब भी माँ उसको लाड से बड़े बुलाये ।।
खुशी क्या है वो माँ के आँखों में उतराये ।
बड़े दिनों के बाद जब लल्ला माँ से मिलने ।।
बड़ी याद तेरी आती है मैया ।
कह कर गले लग जाये।।
खुशी क्या है वो गुडिया की आँखों में डबडबाये ।
बड़े दिनों के बाद पिता जब उसको गले लगाये ।।
रुंधे हुए गले से उसके इतनी आवाज ही आए ।
इतने दिनों कहा थे पापा क्यों ना मिलने आए ।।
खुशी क्या है वो एक पिता के चेहरे पर दिख जाये ।
संतान को देख गर्व से माथा जब उसका चमचामाये ।।
खुशी वो है जो एक बेटे के चेहरे को हर्षाये ।
बड़े लाड से पिता जब सर पर अपना हाथ फिराये ।।
खुशी क्या है वो एक पति के आँखों में दिख जाये ।
जब भी पत्नी निःस्वार्थ भाव से थोडा समय बिताये ।।
खुशी क्या है वो पत्नी के जीवन में दिख जाये ।
बड़े प्यार से पति जब उसको अपना मित्र बनाये ।
प्रेम का इजहार करे ।
और प्रेम भी अपना दिखाये ।।
खुशी वो है जो बहना के खुशियों में चार चाँद लगाये ।
जब भी उसका प्यारा भईया बहना से मिलने आए ।।
खुशी वो है जो मित्रों के आँखों में नहीं समाये ।
बड़े दिनों के बाद एक दूजे को ह्रदय लगाये ।।
मगर आज कल खुशी की परिभाषा बदल गयी है ।
पूरी मानवता बनावटी खुशीयों में सिमट गयी है ।।
2 comments:
बहुत बढ़िया वर्णन
Thanks
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