Tuesday, December 1, 2020

खुशी का वर्णन (Description of happiness)

खुशी क्या है वो एक नन्हें की किलकारी में दिख जाये ।
जब भी माँ उसको लाड से बड़े बुलाये ।।

खुशी क्या है वो माँ के आँखों में उतराये ।
बड़े दिनों के बाद जब लल्ला माँ से मिलने  ।।
बड़ी याद तेरी आती है मैया ।
कह कर गले लग जाये।।

खुशी क्या है वो गुडिया की आँखों में डबडबाये ।
बड़े दिनों के बाद पिता जब उसको गले लगाये ।।
रुंधे हुए गले से उसके इतनी आवाज ही आए ।
इतने दिनों कहा थे पापा क्यों ना मिलने आए ।।

खुशी क्या है वो एक पिता के चेहरे पर दिख जाये ।
संतान को देख गर्व से माथा जब उसका चमचामाये ।।
खुशी वो है जो एक बेटे के चेहरे को हर्षाये ।
बड़े लाड से पिता जब सर पर अपना हाथ फिराये ।।

खुशी क्या है वो एक पति के आँखों में दिख जाये ।
जब भी पत्नी निःस्वार्थ भाव से थोडा समय बिताये ।।

खुशी क्या है वो पत्नी के जीवन में दिख जाये ।
बड़े प्यार से पति जब उसको अपना मित्र बनाये ।
प्रेम का इजहार करे ।
और प्रेम भी अपना दिखाये ।।

खुशी वो है जो बहना के खुशियों में चार चाँद लगाये ।
जब भी उसका प्यारा भईया बहना से मिलने आए ।।

खुशी वो है जो मित्रों के आँखों में नहीं समाये ।
बड़े दिनों के बाद एक दूजे को ह्रदय लगाये ।।

मगर आज कल खुशी की परिभाषा बदल गयी है ।
पूरी मानवता बनावटी खुशीयों में सिमट गयी है ।।

2 comments:

Poetry Lover said...

बहुत बढ़िया वर्णन

Rahul Mishra said...

Thanks