Thursday, December 3, 2020

प्रकृति (Nature)







 



प्रकृति देती है मानवता को जीवन आधार, आज चल रहा उसका व्यापार ।
आओ थोडा पढ़कर समझे प्रकृति की महत्ता, उस पर हो रहा अत्याचार  ।

प्रकृति ने दिए खुले मैदान, पर्वत, नदियां, उपवन और आसमान  ।
धुप, छांव, जल, फल और फूल भी है प्रकृति का वरदान  ।

कुछ है ऊँचा कुछ है गहरा, कुछ खुद में राज छुपाये गहरा  ।
कुछ गायब कर देता है चेहरा, कुछ देता सरहद बन पहरा  ।

फूलों का खिलाना है जीवन खुशियों से भर देना
फूलों का मुरझा जाना सिखलाये जीवन नव देना  । 

जल का कल कल, खग और भ्रमरों का संगीत 
मानव जीवन में भर देता है प्रित । 

यदि प्रकृति का करोगे अंत 
ख़त्म हो जायेगा जीवन से बसंत । 

प्रकृति की छटा है सबसे प्यारी
सुबह की धुप शाम की अंधियारी  । 

चाँद की चांदनी टिमटिमाते तारे 
लगते है मन को बड़े प्यारे । 

प्रकृति तेरा हर रूप है प्यारा, 
जैसे नदियाँ और झरने की धारा । 
जहा गया है इनको सवारा 
सवर गया है सभ्यता सारा  । 

प्रकृति का करिश्मा है हरियाली 
करती है सेवा बनकर माली । 

प्रकृति की है मनमोहक रचना 
पर्वतों से सुन्दर हवा का बहना  । 
सागर से ठंडी हवा का चलना 
तन मन को शीतल कर देना  । 

काली काली घटा का घिरना 
बारिस की बूंदों का गिरना  । 
बूंद बूंद से नदियों का बनना
प्रकृति तेरी अद्भुत है रचना । 

प्रकृति को जो तुम बर्बाद करोगे 
जीवन जीना दुस्वार करोगे । 

नहीं मिलेगी ताज़ी हवा नहीं मिलेगी चैन की साँस 
ऐसे ही रहे पेड काटते जीवन को लग जाएगी फांस । 
 
भविष्य में जीवन को ओक्सिजन बैग से मुक्त है करना 
पेड़ लगाओ सीखो उपयुक्त समय का करना  ।